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सीरवी भाईयो ने विपत्ति में किया अपना स


सीरवी भाईयो ने विपत्ति में किया अपना स

पिछले हफ्ते मानवता के कुछ ऐसे उदाहरण मेरे सामने आए जिसका उल्लेख करना मुझे अच्छा लगा ! प्रथम उदाहरण ढोला गांव में आई विकृत बाढ़ और आपदा के समय मिला जिसमें हमारे सीरवी समाज के "श्री विजय जी सीरवी मरुधर जी" ने अपने तन -मन -धन से पूर्ण सहयोग कर रात दिन एक कर आज तक उनकी सेवा में लगे हुए हैं ! हमारे यहां एक कहावत है कि "मुसीबत में कोई नेडो ई नी आवे " और यह कहावत हम सब पर लागू होती है हम सब बातें तो बड़ी बड़ी कर लेते हैं लेकिन जब किसी के सहयोगव व सहायता करने का समय आता है तब हम बहाने बना लेते हैं , किंतु ढ़ोला गांव में हमने और आपने देखा कि हमारे भाई विजय जी ने दिन- रात एक कर अपने आप को पूर्ण रुप से पीड़ितों की सेवा में समर्पित कर दिया !! मैं विजय जी व उनकी टीम को को कोटि-कोटि नमन् करता हूं !! ऐसी सेवा के लिए उनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है !! दूसरा उदाहरण मुझे मिला हमारे थाना बडेर के अध्यक्ष साहब श्रीमान दिनेश जी भाई साहब ने बताया कि उनके श्रीमान मोटाराम जी को ओम हॉस्पिटल पाली में एडमिट किया गया और उनको ब्लड की अत्यंत आवश्यकता थी उसी समय दिनेश जी भाई साहब ने "श्रीमान गोतम जी भाई साहब" को फोन किया गौतम जी भाई साहब तुरंत उनके साथ गए और अपना खुद का ब्लड डोनेट कर इस पुण्य काम में एक मानवीय स्वभाव का अनूठा उदाहरण पेश किया !! ऐसे मामलों में भी मैंने बहुत बार देखा है किसी को ब्लड के लिए फोन करते हैं तो वह कहते हैं कि आज तो मैं मारवाड़ हूं ,आज तो मैं बाहर गया हुआ हूं ,आज तो मैं दुकान पर नहीं हूं ,आज तो मैं घर पर नहीं हूं, वे बहुत सारे बहाने बना देते है , मैं यही होता तो होता तो तुरंत आ कर दे देता, लेकिन ऐसे समय में भी बहुत कम लोग सहयोग कर पाते हैं !! इस सहयोग के लिए "मैं श्रीमान गौतम जी भाई साहब को भी कोटि-कोटि नमन् करता हूं " वैसे यह बातें Facebook पर WhatsApp पर नहीं करनी चाहिए क्योंकि मैंने यह भी कहावत सुनी है कि "नेकी करों और दरिया में डालो" परंतु मुझे इसका Plus पॉइंट पॉइंट यह लग रहा है कि हम लोग जो सिर्फ बातें करते हैं अपनी कथनी और करनी में अंतर रखते हैं उनके लिए एक प्रेरणा बने इन दोनों से प्रेरणा लेकर अगर 10% लोग भी मानवीय सहयोग के लिए आगे आए तो मेरी यह पोस्ट एक सकारात्मक कदम होगी !! जय माताजी !!!!!!!