Aaiji Seva Samiti

सुविचार:-

दीपावली के पावन पर्व की सभी समाज के व्यक्तियों को समिति की ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं

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समिति रूपरेखा:-

श्री आईजी सीरवी राष्ट्रीय सेवा समिति जमीनी स्तर पर अपना कार्य करेंगी । समिति का सर्व प्रथम उद्देश्य समाज में शिक्षा, चिकित्सा एवं सेवा । समाज को शिक्षित बनाना इस हेतु समाज में समिति अलग - अलग तरह से कार्यक्रम चलाकर समाज के बच्चों का शिक्षा के प्रति होशला बढ़ाना तथा जागरूकता लाना ताकि समाज शिक्षित हो । समाज को हर प्रकार से चिकित्सा एवं सेवाएँ प्रदान करना । समाज कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान । समिति समाज नशा मुक्त हो इस हेतु अपना पुरा प्रयास समाज में करेंगी । समिति समाज में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार वालों के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा और चिकित्सा जहां तक हो सके वहां तक ।

सीरवी समाज ने हर जगह जहां - जहां तक समाज फैला हुआ है वहां हर जगह माँ श्री आईमाता जी कि बढेर का निर्माण कर भव्य प्राण प्रतिष्ठाएँ कि और आज भी करते हैं । बढेर तो होनी चाहिए यह समाज के लोगों कि श्रृदा हैं माताजी के प्रति । परंतु अब हमें समाज में शिक्षा के मंदिर हेतु कदम उठाने चाहिए ताकि समाज शिक्षित हो । शिक्षा ही प्रत्येक समस्या का समाधान हैं । आज के समय में शिक्षा बहुत जरूरी हैं । इसिलिए समिति उन लोगों का ध्यान मंदिर निर्माण से थोड़ा हटाकर शिक्षा के मंदिर निर्माण हेतु ध्यान आकर्षित करना । ऐसे बहुत से उद्देश्य है जिस पर समिति अपना कार्य करेंगी । जिस परिवार में शिक्षा, संस्कार एवं संस्कृति हैं वही परिवार सर्वगुण संम्पन हैं । समिति को समाज से प्राप्त होने वाली सहायता राशि से समाज को विकास की ओर अग्रसर करेगी।


सीरवी समाज का संक्षिप्त परिचय

"सीरवी" एक क्षत्रिय कृषक जाति हैं. जो आज से लगभग 800 वर्ष पुर्व राजपूतों से अलग होकर राजस्थान के मारवाड़ व गौडवाड़ क्षेत्र में रह रही थी. कालान्तर के बाद यह लोग मेवाड़, मालवा, निम्हाड़ व देश के अन्य क्षेत्र में फेल गयें. वर्तमान में सीरवी समाज के लोग राजस्थान के अलवा मध्यप्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र , गोवा , कर्नाटक , आध्रप्रदेश , तमिलनाडु , केरल , दिल्ली , हिमाचल प्रदेश , दमन दीव , पांण्डिचेरी व देश के अन्य क्षैत्र में बड़ी संख्या में रह रहे हैं.

सीरवी समाज के इतिहास का बहुत कम प्रमाण उपलब्ध हैं. इतिहास के जानकार स्व. मास्टर श्री शिवसिंहजी चोयल भावी ( जिला जोधपुर ) वालों ने अपने सीमित सोधनों में जो कुछ भी तथ्य जुटाये उनके आधार पर खारड़िया राजपूतों का शासन जालोर पर था व राजा कान्हड़देव चौहान वंशीय थे उन्ही के वंश 24 गौत्रीय खारड़िया सीरवी कहलाये. सीरवियों के गौत्र इस प्रकार हैं. 1. राठौड़ 2. सोलंकी 3. गहलोत 4. पंवार 5. काग 6. बर्फा 7. देवड़ा 8. चोयल 9. भायल 10. सैणचा 11. आगलेचा 12. पड़ियार 13. हाम्बड़ 14. सिन्दड़ा 15. चौहान 16. खण्डाला 17. सातपुरा 18. मोगरेचा 19. पड़ियारिया 20. लचेटा 21. भूंभाड़िया 22. चावड़िया 23. मुलेवा 24. सेपटा. अधिकतर सीरवी आईमाता के अनुवयी हैं. श्री आईमाता का मंदिर राजस्थान के बिलाड़ा कस्बा में हैं.

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निवेदन:-

आप सभी सीरवी भाइयों से नम्र निवेदन है कि आप समाज एवं समिति से संबंधित अपने - अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत कर समाज को विकास कि ओर अग्रसर करें और हम सभी मिलकर विकसित समाज का निर्माण करें । हमें आप सभी से पुरी आशा है कि हम सभी मिलकर समाज को शिक्षित, संस्कारीत, समाज सेवा एवं गरीबी से मुक्त समाज निर्माण हेतु आप सभी भाई बंधु अपने पुरे तन, मन, धन से आप अपना सहयोग समिति को प्रदान करेगे।।।


समिति के मुख्य समाचार:-

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सदस्य जानकारी
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    पी.पी. सीरवी
    (सांसद पाली)
    [Union Minister of State Law and Electronics & IT]

  • pukhraj seervi

    पुख राज जी सीरवी
    (सेवानिवृत्त I.G - राज. पुलिस)

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